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गुजरात:राजकोट डॉक्टर ने नवजात को मृत घोषित के बाद श्मशान में चलने लगी सांसें

    राजकोट के एक हॉस्पिटल में रविवार को एक बच्चे का जन्म हुआ और जन्म लेने के कुछ देर बाद ही महिला डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार के लोग बच्चे को लेकर श्मशान पहुंचे। वहीं जब नवजात को दफनाने के लिए गड्ढा खोदा जा रहा था, तभी बच्चे की सांसें चलने लगी। तुरंत ही बच्चे को वापस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लेकिन, 14 घंटों के इलाज के बाद बच्चे की जान चली गई। कोडीनार इलाके में रहने वाले पुलिसकर्मी परेशभाई डोडिया की पत्नी मीतलबेन को प्रसव पीड़ा के चलते रविवार को एक हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। 
      मीतलबेन के गर्भ में जुड़वां बच्चे थे, जिनमें बेटी और बेटा था। दोनों बच्चों का वजह बहुत कम था और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसके चलते दोनों नवजात को केटी चिल्ड्रन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। इलाज के कुछ मिनट बाद ही महिला डॉक्टर ने बेटे को मृत घोषित कर दिया। परिवार बच्चे को श्मशान ले गया, जहां उसके शव दफन के लिए गड्ढा खोदा जा रहा था, तभी पता चला कि बच्चे की सांस चल रही है और उसे वापस अस्पताल लाया गया। अस्पताल में 14 घंटे तक बच्चे का इलाज चला, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
      परिवार ने बच्चे की मौत का जिम्मेदार अस्पताल की महिला डॉक्टर को ठहराया है। वहीं, अस्पताल के प्रमुख डॉ. बुच का कहना है कि बच्चे का जन्म अधूरे मास में हुआ था, ऐसे में उसके बच्चे की संभावना बहुत कम थी। इसी दौरान बच्चे के हार्ट ने काम करना बंद कर दिया था। जवान व्यक्ति की जांच तो स्टेथोस्कोप से की जा सकती है, लेकिन यह जांच नवजात के साथ नहीं की जा सकती। इसीलिए महिला डॉक्टर बच्चे की जांच नहीं कर सकी। मैंने, अपने चिकित्सीय करियर में ऐसी पहली ही घटना देखी है। फिलहाल हम मामले की जांच करवा रहे हैं।

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Written by Mahendra Patil

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